दुमका में सैनिक स्कूल तिलैया, RMS और RIMC की भरोसेमंद AISSEE कोचिंग। संथाल परगना के बच्चों के लिए असली Mock Test, ST-OBC कटऑफ की पूरी समझ, और मुफ़्त Scholarship Test।
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One of Jaipur's leading Sainik School coaching centers with experienced ex-defense faculty and a proven track record of selections.
Specialized in RIMC and Sainik School entrance preparation with both online and offline batches available.
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Most coaching centers focus only on passing the written exam. At Sainik Coaching, we believe that success comes from overall development. We focus on both written exams and discipline.
It's not just about GK and Maths. It's about being on time, being disciplined, and having the courage to face any challenge.
Learn from those who have passed these exams or served in the army. They know exactly what it takes to get selected.
Practice with real OMR sheets every day to remove exam fear and improve speed.
Study material that is updated every year according to the latest Sainik & RIMC patterns.
Small batches mean every child gets help from teachers. No child is just another roll number.
Secure hostel for students from other cities with healthy food and careful supervision.
Completing the syllabus is only half the work. The other half is practicing with a timer. Our free mock tests help your child check their preparation and avoid simple mistakes in the real exam.
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Good food is important for focus. Our kitchen serves fresh, balanced, and hygienic meals designed to keep students active and healthy.
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A peaceful environment is necessary for self-study. Our study halls are designed for deep focus where teachers are available to clear doubts instantly.
Whether you study from the comfort of your home or join our physical campus, we provide high-quality and focused guidance to every student.
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Sainik School & RMS
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Maharashtra has three Sainik Schools — Satara (1961), Chandrapur (2019), and the newly approved Ambajogai (2026). Seats, fees, cut-off, admission process and eligibility for all three — in one place, with verified official sources.
UP में लाखों बच्चे AISSEE देते हैं — लेकिन सही plan के बिना तैयारी अधूरी रहती है। यह guide आपको January से January तक का पूरा roadmap देती है — paper pattern, month-wise plan, online batch options, और UP के specific challenges सब एक जगह।
Bihar पहला राज्य था जिसको एक ही दिन में दो Sainik Schools मिले — Nalanda और Gopalganj। आज भी यहाँ से NDA में सबसे ज़्यादा selections होते हैं। पूरी admission guide, fees, cut-off, और reservation की जानकारी — सब हिंदी में, verified data के साथ।
राजस्थान में सिर्फ़ 2 Sainik Schools हैं — Chittorgarh (1961) और Jhunjhunu (2018)। बीच में 57 साल का gap क्यूँ रहा? Cut-off कितना ज़रूरी है? और कौन सा school किस family के लिए सही है? सब verified data के साथ।
मसानजोर बांध के पानी में जो शांति दिखती है, उसके पीछे एक लंबी मेहनत छुपी होती है। दुमका की मिट्टी भी कुछ ऐसी ही है। ऊपर से सीधी-सादी, पर अंदर एक पुरानी मज़बूती लिए हुए।
संथाल परगना की राजधानी होने का मतलब सिर्फ नक्शे पर एक नाम नहीं है। ये वो इलाक़ा है जहाँ पीढ़ियों से आदिवासी परिवारों ने अपनी अलग पहचान बनाई है, जहाँ छोटे किसान खेत की हर बूँद से उम्मीद निकालते हैं, और जहाँ माँ-बाप का सबसे बड़ा सपना बस यही होता है कि उनका बच्चा वहाँ पहुँचे जहाँ वो खुद कभी नहीं पहुँच पाए।
ठीक इसी जगह सैनिक स्कूल तिलैया की सीट एक नई राह खोलती है। बच्चे की काबिलियत पर सवाल नहीं, सवाल बस सही रास्ते का होता है। और इसके लिए भागलपुर या रांची तक जाने की कोई ज़रूरत नहीं, ये पूरा सफ़र यहीं दुमका से शुरू हो सकता है। शुरुआत के लिए पहला Assessment हम बिल्कुल मुफ़्त में करते हैं।
आप किसी भी सेंटर में चले जाइए, बातें लगभग एक जैसी मिलेंगी। आपको एक लंबा सिलेबस दिखाया जाएगा, चैप्टरों की गिनती करवाई जाएगी, और नोट्स की एक भारी सी फाइल आपके हाथ में पकड़ा दी जाएगी।
मगर घड़ी की बात कोई नहीं करेगा।
जबकि असली कहानी तो वहीं से शुरू होती है। AISSEE ↗ की परीक्षा में बच्चे को सिर्फ 150 मिनट के अंदर पूरे 125 सवाल हल करने होते हैं, यानी हर सवाल पर लगभग एक मिनट का समय। अब पूरा सिलेबस याद होने के बाद भी, अगर बच्चा कभी टाइमर के साथ बैठा ही नहीं है, तो असली परीक्षा हॉल में जाकर दिमाग एक जगह अटक जाता है। एक मुश्किल सवाल पर रुकता है, और इसी चक्कर में पंद्रह आसान सवाल वहीं छूट जाते हैं। मेहनत पूरी की थी, पर रिज़ल्ट कुछ और निकलता है।
रफ्तार कोई जन्मजात गुण नहीं होती, इसे अभ्यास से धीरे-धीरे पकाया जाता है। हमारे यहाँ पहले ही हफ्ते से हर शनिवार पूरा Mock Test रखा जाता है, असली OMR शीट के साथ, सख्त 150 मिनट के समय में, और बिल्कुल जनवरी की असली परीक्षा जैसा माहौल बनाकर। जब बच्चा बीस-पच्चीस बार इसी पूरे अनुभव से गुज़र चुका होता है, तब असली हॉल में जाने पर भी सब कुछ जाना-पहचाना सा लगता है।
दुमका और उसके आस-पास के इलाक़ों में आदिवासी आबादी काफी बड़ी है, और ज़्यादातर परिवारों को पता ही नहीं होता कि Sainik School Tilaiya में उनके बच्चों के लिए कितनी बड़ी संभावना रखी हुई है।
देखिए मामला ऐसा है कि कुल सीटों में से 67% सीधे Home State कोटे में जाती हैं, यानी ये सीटें झारखंड के बच्चों के लिए ही अलग रखी जाती हैं। बाहर के राज्यों के लिए तो सिर्फ 33% ही बचती हैं। और इसी होम-स्टेट कोटे के अंदर ST के लिए 7.5%, OBC के लिए 27% और SC के लिए 15% सीटें अलग से तय की गई हैं।
संथाल परगना से आने वाले ST कैटेगरी के बच्चों के लिए तो ये बात और भी अहम है क्योंकि उनका कटऑफ अक्सर इतना कम होता है कि सुनने के बाद माँ-बाप कई बार दोबारा पूछते हैं कि क्या ये सच है।
हम पहले ही दिन कागज़ पर साफ-साफ नंबर लिखकर आपको दिखाते हैं कि कौन सी कैटेगरी में कितनी सीटें खाली हुई थीं, पिछले साल किस नंबर पर सीट मिल गई थी, और आपके बच्चे को असल में कितने मार्क्स की ज़रूरत है। हम राष्ट्रीय औसत वाली घुमावदार बात नहीं करते, सीधा आपके बच्चे का खुद का सटीक लक्ष्य निकालकर सामने रखते हैं।
वैसे जानकारी के लिए बता दें कि Sainik School Tilaiya की कक्षा 6 में लड़कों के लिए कुल 106 सीटें और लड़कियों के लिए 12 सीटें होती हैं।
AISSEE कक्षा 6 की तैयारी में बच्चे को गणित, अंग्रेज़ी, GK और Intelligence पढ़ाई जाती है। यहाँ एक पक्का नियम है कि जब तक बच्चा किसी चैप्टर में 70% मार्क्स नहीं ले आता, तब तक अगला टॉपिक उसके सामने नहीं खुलता। आगे बढ़ने की रफ्तार पूरी तरह बच्चे की अपनी पकड़ पर निर्भर करती है, हमारे कैलेंडर पर नहीं।
AISSEE कक्षा 9 की तैयारी में ऊपर वाले विषयों के साथ Science और Social Science भी जुड़ जाते हैं। हर बुधवार को chapter test लिया जाता है, और हर शनिवार सुबह 8 से 10:30 तक पूरा Mock पेपर करवाया जाता है।
RMS कोचिंग की बात करें तो Rashtriya Military School का पेपर अपनी एक अलग ही चाल रखता है, इसमें Reasoning पर बाक़ी विषयों से कहीं ज़्यादा ज़ोर रहता है। यहाँ असली RMS पैटर्न पहले हफ्ते से ही शुरू कर दिया जाता है, दो-तीन महीने इंतज़ार करने की कोई बात नहीं।
RIMC ↗ कोचिंग में बच्चे को देहरादून जाने से पहले लिखित परीक्षा, Interview और Viva, इन तीनों की एक साथ तैयारी करवाई जाती है। यहाँ Retired Army Officers असली Mock Panel बैठाते हैं, ताकि जब बच्चा सचमुच देहरादून पहुँचे तो उसे वहाँ का माहौल बिल्कुल पराया न लगे।
Crash Course उन परिवारों के लिए बनाया गया है जिन्हें अक्टूबर में जाकर तैयारी का ख़याल आता है और जनवरी सिर पर खड़ी होती है। ऐसे बच्चों के लिए रोज़ क्लास, रोज़ टेस्ट और शाम 7:30 से 8:30 तक Doubt Session रखा जाता है। मेहनत भारी है, इससे इनकार नहीं, पर ये कोर्स नतीजा देकर ही रहता है।
Foundation Batch उन परिवारों के लिए है जिनके बच्चे अभी कक्षा 4 या 5 में हैं। ये क्लास सिर्फ शनिवार को लगती है, जिसमें Mental Maths, Picture Reasoning और छोटे passage करवाए जाते हैं। बच्चे पर कोई दबाव नहीं डाला जाता। जब वो कक्षा 6 तक पहुँचता है, तब तक AISSEE का तरीका उसके लिए आधा घर का हो चुका होता है।
| साल | सैनिक स्कूल | RMS | RIMC / नवोदय |
|---|---|---|---|
| 2025 | 7 चयन | 2 | 1 RIMC + 3 नवोदय |
| 2024 | 5 चयन | 1 | 1 RIMC |
| 2023 | 4 चयन | 1 | - |
पिछले साल जरमुंडी के पास के एक आदिवासी परिवार के बच्चे की कहानी बताने लायक है। उसके पिता खेती करते हैं और माँ घर का काम संभालती हैं। पूरी ज़िंदगी में किसी प्राइवेट कोचिंग का नाम तक नहीं सुना था। अप्रैल में जब उसने हमारा Scholarship Test दिया, तो उसकी समझ और मेहनत देखकर हमने पूरी फीस माफ़ करने का फ़ैसला लिया। फिर नौ महीने उस बच्चे ने जो लगन दिखाई, उसका नतीजा ये निकला कि आज वो Sainik School Tilaiya में पढ़ रहा है। जिस दिन उसका सेलेक्शन confirm हुआ, उसके पिता ने अपने खेत पर बैठकर देर तक सिर्फ आसमान देखा था।
यही असली कमाई है इस काम की।
हम हर साल अप्रैल और सितंबर में एक Scholarship Test रखते हैं जो दुमका ज़िले और पूरे संथाल परगना के किसी भी बच्चे के लिए खुला होता है। इसमें एक रुपये का भी Registration Fee नहीं लिया जाता।
जहाँ तक फीस में छूट का सवाल है, पिछले साल हमने 14 परिवारों को 25% से लेकर 100% तक की रियायत दी थी। यहाँ न कोई लंबा फॉर्म भरना होता है, न हफ्तों कागज़ इधर-उधर घूमते हैं, फैसला उसी दिन सामने बैठकर कर दिया जाता है।
आदिवासी परिवारों के लिए हमने अलग से एक विशेष Scholarship Pool रखा है, क्योंकि हम मानते हैं कि संथाल परगना के बच्चों को आगे बढ़ाने का काम सिर्फ नारे लगाने से नहीं, बल्कि असली मदद से होता है।
Ex-Servicemen परिवारों को हम बिना किसी शर्त के सीधी छूट देते हैं। आप अपना Service Document लेकर आइए, बाकी का सारा काम हम पर छोड़ दीजिए।
और दुमका के सरकारी कर्मचारी और छोटे किसान परिवारों के लिए हमने आसान EMI की सुविधा भी रखी है, ताकि बजट कभी आपके बच्चे के सपने की राह में दीवार बनकर खड़ा न हो।
हमारे यहाँ बच्चे को सिर्फ अपनी क्लास के पंद्रह बच्चों के बीच नहीं, बल्कि पूरे देश के हज़ारों बच्चों के बीच असली All-India Mock Rank दी जाती है। इससे बच्चे को हर हफ्ते पता चलता रहता है कि वो असल में कहाँ खड़ा है, और उसे और कितनी मेहनत की ज़रूरत है।
अगर NTA अपना AISSEE पैटर्न बदलता है, तो हम अपना material सबसे पहले update करते हैं, और तीन हफ्ते के अंदर नए नोट्स बच्चे के हाथ में पहुँचा देते हैं। पुराने मटीरियल से बच्चे को कभी जूझना नहीं पड़ता।
हर महीने हम Parents Meeting रखते हैं जिसमें माँ-बाप को सीधे और साफ बताया जाता है कि बच्चे के कौन से दो टॉपिक कमज़ोर हैं, और अगले चार हफ्ते में हम उन पर क्या करने वाले हैं। हम बातों में नहीं घुमाते, सीधा एक लिखा हुआ प्लान आपके हाथ में थमा देते हैं।
हर सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे तक हमारी expert faculty Doubt Support Session चलाती है, जिसमें बच्चा घर बैठे फ़ोन उठाकर अपनी हर छोटी-बड़ी उलझन हल कर सकता है। और जहाँ तक हमारी ज़िम्मेदारी का सवाल है, हम AISSEE की लिखित परीक्षा से लेकर Medical Test और RIMC Interview तक बच्चे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं। जब तक बच्चा अपने स्कूल के गेट के अंदर पैर नहीं रख देता, तब तक हम पीछे नहीं हटते।
बहुत से परिवार अक्सर सोचने लगते हैं कि बच्चे को भागलपुर भेज दें, धनबाद भेज दें, या किसी और बड़े शहर में डाल दें। पर एक बार ठहरकर सोचिए, दस-ग्यारह साल का छोटा सा बच्चा घर से इतनी दूर, ऊपर से हॉस्टल का इतना बड़ा खर्च, और माँ की वो रोज़ की चिंता जो रात को सोने नहीं देती।
सच पूछिए तो इस पूरे जोखिम की ज़रूरत ही नहीं है।
Sainik School Tilaiya खुद कोडरमा ज़िले में है, जो दुमका से सड़क के रास्ते लगभग 220 किलोमीटर की दूरी पर है। अगर तैयारी यहीं घर पर हो जाए, तो बच्चा रोज़ माँ के हाथ का खाना खा सकता है, रोज़ अपने वक्त पर क्लास निपटा सकता है, और परीक्षा वाले दिन बिना किसी डर के, बस पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी सीट पर बैठ सकता है।
आप चाहें तो सीधे हमारे सेंटर पर चले आइए, या घर बैठे एक Video Call कर लीजिए, या फिर बस एक फ़ोन घुमा दीजिए। हम किसी भी दिन उपलब्ध हैं, कोई शुल्क नहीं लेते, और न ही किसी तरह का दबाव बनाते हैं।
बस एक छोटी सी मुलाक़ात की देर है, और आपके सामने साफ हो जाएगा कि आपके बच्चे के अंदर असल में क्या ताक़त छुपी हुई है, और उसे कहाँ तक पहुँचाया जा सकता है।