भारत में जो माता-पिता अपने बच्चे को Rashtriya Indian Military College, देहरादून में भेजना चाहते हैं, उनके मन में सबसे पहला सवाल यही आता है — इसकी फीस कितनी है? और क्या हम इसे afford कर सकते हैं? यह एक बिल्कुल स्वाभाविक और जरूरी सवाल है। RIMC देहरादून एक सरकारी संस्थान है जो भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आता है। इसीलिए यहाँ की फीस किसी प्राइवेट बोर्डिंग स्कूल की तुलना में काफी कम और सुलभ है। लेकिन फीस का पूरा ढांचा समझना जरूरी है — क्योंकि इसमें ट्यूशन फीस के अलावा भी कई चीजें शामिल होती हैं। इस लेख में हम RIMC की फीस, स्कॉलरशिप, सब्सिडी और पेमेंट से जुड़ी हर जरूरी जानकारी सरल भाषा में देंगे।
RIMC देहरादून की बेसिक फीस स्ट्रक्चर
RIMC में फीस टर्म-वाइज ली जाती है। हर साल दो टर्म होते हैं — जनवरी से जून और जुलाई से दिसंबर। फीस में मुख्य रूप से निम्नलिखित चीजें शामिल होती हैं।
ट्यूशन फीस, बोर्डिंग और लॉजिंग चार्ज, मेस चार्ज यानी खाने-पीने का खर्च, यूनिफॉर्म और किताबों का खर्च, मेडिकल सुविधाएं, खेलकूद और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज का खर्च।
वर्तमान में RIMC की कुल टर्म फीस लगभग ₹35,000 से ₹40,000 प्रति टर्म के आसपास है। यानी सालाना खर्च लगभग ₹70,000 से ₹80,000 तक होता है। यह राशि किसी प्राइवेट मिलिट्री स्कूल की तुलना में बहुत कम है जहाँ सालाना फीस कई लाख रुपये तक जा सकती है।
हालांकि माता-पिता को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि टर्म फीस के अलावा कुछ एकमुश्त खर्च भी होते हैं जैसे एडमिशन के समय सिक्योरिटी डिपॉजिट और यूनिफॉर्म का पहला सेट। ये खर्च पहले साल में थोड़े अधिक हो सकते हैं लेकिन बाद के सालों में फीस का ढांचा स्थिर और अनुमानित रहता है।
क्या RIMC में स्कॉलरशिप मिलती है?
हाँ। और यह RIMC की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है। भारत सरकार यह सुनिश्चित करती है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चे भी RIMC में पढ़ सकें। इसके लिए कई स्तरों पर वित्तीय सहायता उपलब्ध है।
राज्य सरकार की स्कॉलरशिप
अधिकांश राज्य सरकारें अपने राज्य के RIMC छात्रों को स्कॉलरशिप देती हैं। यह स्कॉलरशिप राज्य के सैनिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से दी जाती है। राशि और पात्रता हर राज्य में अलग-अलग हो सकती है। माता-पिता को अपने राज्य के सैनिक कल्याण बोर्ड से संपर्क करके इस बारे में सटीक जानकारी लेनी चाहिए।
केंद्र सरकार की सहायता
RIMC एक केंद्र सरकार का संस्थान है और रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आता है। इसीलिए यहाँ पहले से ही भारी सब्सिडी दी जाती है। जो फीस छात्र चुकाते हैं वह RIMC की वास्तविक प्रति छात्र लागत का एक बहुत छोटा हिस्सा होती है। बाकी का खर्च सरकार वहन करती है।
भूतपूर्व सैनिकों के बच्चों के लिए विशेष सुविधा
अगर किसी छात्र के पिता या दादा भारतीय सेना, नौसेना या वायु सेना में सेवा कर चुके हैं या अभी सेवा में हैं तो उन्हें फीस में अतिरिक्त छूट मिल सकती है। यह छूट Kendriya Sainik Board के माध्यम से दी जाती है। ऐसे परिवारों को आवेदन के समय सर्विस सर्टिफिकेट जमा करना होता है।
पेमेंट कैसे और कब करनी होती है
RIMC की फीस टर्म की शुरुआत में जमा करनी होती है। एडमिशन के समय स्कूल द्वारा एक डिमांड लेटर दिया जाता है जिसमें फीस की पूरी जानकारी होती है। पेमेंट बैंक के माध्यम से या डिमांड ड्राफ्ट के जरिए की जाती है।
माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि फीस समय पर जमा हो क्योंकि देरी से जमा करने पर लेट फीन लग सकती है। अगर किसी टर्म में फीस जमा करने में कठिनाई हो तो स्कूल प्रशासन से पहले ही बात करना बेहतर रहता है।
RIMC की फीस इतनी कम क्यों है
यह सवाल बहुत माता-पिता पूछते हैं। इसका जवाब सरल है। RIMC एक सरकारी संस्थान है जिसका उद्देश्य प्रतिभाशाली बच्चों को सशस्त्र बलों में अफसर बनने के लिए तैयार करना है। सरकार चाहती है कि देश के हर कोने से — चाहे वह अमीर परिवार हो या साधारण — प्रतिभाशाली बच्चे इस संस्थान तक पहुँच सकें। इसीलिए फीस को जानबूझकर कम रखा गया है और स्कॉलरशिप का प्रावधान किया गया है।
माता-पिता के लिए जरूरी सलाह
एडमिशन मिलने के बाद फीस से जुड़ी पूरी जानकारी RIMC के ऑफिशियल वेलकम लेटर में दी जाती है। माता-पिता को चाहिए कि वे उस लेटर को ध्यान से पढ़ें और किसी भी संदेह के लिए सीधे स्कूल के अकाउंट्स सेक्शन से संपर्क करें। राज्य स्कॉलरशिप के लिए आवेदन एडमिशन के तुरंत बाद करना चाहिए क्योंकि कई राज्यों में इसकी एक निश्चित डेडलाइन होती है।
RIMC में पढ़ाई का खर्च जितना लगता है उससे कहीं ज्यादा मिलता है। एक मजबूत शिक्षा, अनुशासन, राष्ट्रीय स्तर की पहचान और एक ऐसा भविष्य जो बच्चे की पूरी जिंदगी को दिशा देता है — यह सब मिलकर RIMC को भारत के सबसे मूल्यवान शैक्षणिक निवेशों में से एक बनाते हैं।